कोरोना से हुई मौत क्‍या जीवन बीमा पॉलिसी के दायरे में आएगी?

मौजूदा लाइफ इंश्‍योरेंस पॉलिसी

समाचार आज तक,     22 August 2020(अमिता शर्मा)

कोरोना वायरस से अगर किसी पॉलिसीहोल्‍डर की मौत होती है तो नॉमिनी को डेथ बेनिफिट के तौर पर सम एश्‍योर्ड यानी बिमित राशि मिलेगी.

पॉलिसी बाजार डॉट कॉम की चीफ बिजनेस ऑफिसर संतोष अग्रवाल कहती हैं, ”अगर मृतक के पास लाइफ इंश्‍योरेंस पॉलिसी थी तो नॉमिनी को यह पता होना चाहिए कि स्‍वास्‍थ संबंधी मामले अमूमन जीवन बीमा पॉलिसी में कवर होते हैं.”

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देश में वैसे तो ज्‍यादातर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ कवर दे रही हैं. लेकिन, कुछ मामलों में इलाज के क्‍लेम को खारिज किया जा सकता है. यहां हम उन्‍हीं स्थितियों के बारे में बता रहे हैं.
1-अगर कम से कम 24 घंटे भर्ती नहीं रहते हैं
कोरोना वायरस के कारण हेल्‍थ इंश्‍योरेंस का क्‍लेम केवल तभी मिलेगा अगर पॉलिसीधारक कम से कम 24 घंटे के लिए अस्‍पताल में भर्ती रहता है. हालांकि, पॉलिसीधारक के भर्ती न होने पर क्‍लेम कवर नहीं होगा. वजह यह है कि इनडेमनिटी प्रकार की ज्‍यादातर हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी ओपीडी ट्रीटमेंट को कवर नहीं करती हैं.

फ्यूचर जनरली इंडिया इंश्‍योरेंस के सीओओ श्रीराम देशपांडे ने कहा, ”कोरोना वायरस के कारण अस्‍पताल में भर्ती होने पर किसी अन्‍य बीमारी की तरह इलाज कवर होता है. क्‍लेम को नियमों के अनुसार प्रोसेस किया जाता है. बशर्ते अस्‍पताल में भर्ती का समय 24 घंटे से ज्‍यादा का हो.”
2-अगर बीमारी को महामारी घोषित कर दिया जाए
आपकी हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी उस स्थिति में शायद क्‍लेम सेटेल न करे अगर रोग को विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍लूएचओ) महामारी घोषित कर दे.

एसबीआई जनरल इंश्‍योरेंस के अंडराइटिंग और रीइंश्‍योरेंस के हेड सुब्रमण्‍यम ब्रह्मजॉयसुला ने कहा, ”अगर कोरोना वायरस को डब्‍लूएचओ या भारत सरकार या दोनों महामारी घोषित कर दें तो क्‍लेम का शायद भुगतान न किया जाए. कारण है कि ऐसे क्‍लेम को कई हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी में बाहर रखा जाता है.”
हालांकि, एसबीआई जनरल इंश्‍योरेंस में हेड-मार्केटिंग अंडरराइटिंग ऑपरेशन पंकज वर्मा ने कहा, ”हमारी स्‍टैंडर्ड हेल्‍थ पॉलिसी कोरोना वायरस को कवर करती है. क्‍लेम के मोर्चे पर हम मानते हैं कि कोरोना वायरस महामारी के स्‍तर तक का रोग है और इसका लोगों की जिंदगी पर गहरा असर होगा. इसलिए हम हर तरह की मदद मुहैया करा रहे हैं. एसबीआई जनरल इस तरह का कोई क्‍लेम खारिज नहीं कर रही है.”
लिहाजा, घबराने की जगह लोगों का अपनी बीमा कंपनी से पूछना चाहिए कि वे अपनी पॉलिसी में कोरोना वायरस को कवर कर रहे हैं कि नहीं.
3-अगर प्‍लांड ट्रीटमेंट के लिए जा रहे हैं
पिछले चार हफ्तों से अगर आप सांस से जुड़ी से किसी तरह की बीमारी से पीड़‍ित हैं तो रेगुलर इनडेमनिटी टाइप हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी में क्‍लेम खारिज हो सकता है. उदाहरण के लिए अगर आप पिछले कुछ दिनों से गंभीर कफ, सांस की बीमारी, फ्लू आदि से पीड़‍ित हैं तो संभव है कि आपकी पॉलिसी कोरोना वायरस के संक्रमण को कवर नहीं करे.
4-अगर पॉलिसी के वेटिंग पीरियड में संक्रमित होते हैं
अगर वेटिंग पीरियड में किसी बीमारी को एक्‍सक्‍लूड किया गया है तो पॉलिसीधारक पॉलिसी के वेटिंग पीरियड में रोग के इलाज पर हुए खर्च को क्‍लेम नहीं कर सकते हैं. अमूमन पॉलिसी के वेटिंग पीरियड में ज्‍यादातर पॉलिसियां कई तरह के उपचार को बाहर रखती हैं.
5-अगर आप या आपके परिवार के सदस्‍य संक्रमण प्रभावित देशों में हाल में गए हैं
आदित्‍य बिड़ला हेल्‍थ इंश्‍योरेंस के सीईओ मयंक बथवाल ने कहा कि हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी के मामले में अगर पॉलिसीधारक कोरोना प्रभावित देश से ट्रैवल करके आया है और उसे पॉजिटिव पाया जाता है तो वे तब तक रेगुलर इनडेमनिटी हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी के तहत कवर होंगे जब तक भारत में उन्‍हें क्‍वारेंटाइन किया जा रहा है.
हालांकि, स्‍पेशल कोरोना वायरस इंश्‍योरेंस पॉलिसी उन लोगों को कवर नहीं करती है जो चीन, हांगकांग, मकाऊ, ताइवान, इटली, कुवैत, जापान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, थाईलैंड इत्‍यादि जैसे देशों से आए हैं.
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