गरीब बाल मजदुर श्रमिकों को कारखानों,फर्मों आदी से मुक्त करवाने और उन्हें न्याय दिलवाने में फर्क है:-“सारस”*

*गरीब बाल मजदुर श्रमिकों को कारखानों,फर्मों आदी से मुक्त करवाने और उन्हें न्याय दिलवाने में फर्क है:-“सारस”*

*चंद महीने पहले छुड़वाए गये 47बाल मजदूरों को न्याय मिल गया क्या.. ?*

Smachar Aaj Tak, Jalandhar ( Amita): जालंधर के फार्म हाउस से कल 37 बाल श्रमिकों को मुक्त कराने की चर्चा और उसका श्रेय लेने की मानो होड़ सी लग गई है lजबकि इस आपाधापी में बाल अधिकार की वकालत करनेवाले और अपनी स्वयं की पीठ थपथपानेवाले संगठनात्मक लोग यह क्यों भुल जाते हैं की वह जाने अनजाने में किसी शोषित बच्चे का भला नहीं कर रहे बल्कि उनकी गरीबी का मजाक उड़ा रहे होते हैं जिनके पुनर्वास तक के लिए सरकार के पास फंड की कमी है!नैतिक सामाजिक संस्था और बाल अधिकारों को लेकर सजग संस्थान “सारस”के चीफ डायरेक्टर शंकर कुमार चौधरी ने उक्त विचार साझा किये हैं lउन्होंने आगे बताया की बच्चों को कारखानों,फार्म हाउसों, या फर्म आदी से छुड़वाने भर तक को सीमित या फिर उन्हें अन्य राज्यों से तस्करी कर के लाये जाने जैसी खबरों के तह तक गये बगैर उसे सनसनी फ़ैलाने के मकसद से मिडिया में परोसनेवाले नैतिकता का विशेष खयाल रखें lसरकार और प्रसाशन की उदासीनता के शिकार कल छुड़ाये गये यह बिहार के 37 मासूम नहीं होंगे इसकी गारंटी कौन देगा ?चंद दिनों पहले हीं जालंधर के हीं रबर फैक्ट्री से छुड़ाये गये 42मासूमो को न्याय मिल गया गया.. ?उन्होंने जोर देकर कहा की जबतक गरीब और मजबूर बच्चों के नाम पर नौटंकी संस्थाएं अपनी दुकानदारी चलाती रहेंगी मुल्क में असहाय और शोषित बच्चों को उनका अधिकार मिलना किसी सपने के सच होने जैसा हीं है l

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