कैंट में काटी गई अवैध कॉलोनियों को लेकर सोसाइटी ने मुद्दा उठाया, अब तो देना पड़ेगा रेवेन्यू, नहीं बच पाएगा कोई कॉलोनाइजर, 21 करोड़ का घोटाला,

समाचार आज तक, जालंधर 26 नवंबर 2020:

कैंट में एक कॉलोनाइजर का 21 करोड़ का घोटाला सामने आया है बाकी पर भी नगर निगम ने पैनी नजर बनाकर रखी हुई है।

The society raised the issue of illegal colonies cut in Cantt, now will have to give revenue, no colonizer will be saved, 21 crore scam,

कैंट और आसपास के इलाके में बिना मंजूरी के 18 अवैध कॉलोनियां काटने वाले कॉलोनाइजर पर वीरवार से निगम प्रशासन कार्रवाई कर दी है। कैंट इलाके में धड़ल्ले से चल रहा है इल्लीगल कॉलोनियों का कारोबार केवल 10 परसेंट फीस ही जमा कराकर कॉलोनी और रेगुलर करने का आवेदन कर रखा है कॉलोनाइजरों ने कैंट में कई इलाके जहां पर अवैध कॉलोनियों का कारोबार फल-फूल रहा है निम्न है

दीपनगर रोड पर 4 कॉलोनियां

बडिंगमें काटी गई कॉलोनियां

गुरुद्वारे की बैक साइड में दीप नगर रोड पर काटी गई कॉलोनी

मोदी रिसोर्ट के साथ काटी गई कॉलोनी जिस पर पहले से ही राकेश कुमार के नाम पर बैंक लोन है।

ऐसे ही कई कॉलोनियों का घाला माला कैंट में हो रहा है।

बिल्डिंग एडहॉक कमेटी के चेयरमैन निर्मलजीत सिंह निम्मा , मेंबर पार्षद सुशील कालिया की अगुआई में कमेटी मेंबर बिल्डिंग ब्रांच की टीम को लेकर इन कॉलोनी की पैमाइश कराएंगे ताकि पता चल सके कि कॉलोनाइजर राकेश कुमार द्वारा रेगुलर करने के लिए दिए गए आवेदन में बताई गई कॉलोनियों का रकबा सही है या उससे ज्यादा जमीन पर कॉलोनियां काटी गई हैं । इस संबंध में मेंबर पार्षद सुशील कालिया ने बताया कि वीरवार से एक – एक कर कॉलोनी की पैमाइश र करेंगे , साथ ही उसकी फीस भी f तय कराएंगे । वैसे भी कमेटी ने गत दिवस एमटीपी द्वारा दिए गए रिकॉर्ड की स्टडी कर खुलासा किया था कि इस कॉलोनाइजर ने 10 फीसदी फीस के साथ 10 कॉलोनियां रेगुलर करने का आवेदन कर रखा है , जबकि 8 कॉलोनियों के आवेदन निगम ने पेंडिंग थे । इसके लिए कोई फीस अब तक नहीं दी गई है । ऐसे में सिर्फ इस कॉलोनाइजर पर करीब 21 करोड़ रुपए की फीस बनती है , जिसमें से सिर्फ 9 लाख रुपए जमा कराए गए हैं । जिक्रयोग है कि कॉलोनाइजर ने निगम को निर्धारित फीस से कम पैसे जमा करवाए थे जबकि ज्यादा जमीन पर कॉलोनियां काट ली थीं ।

यह कॉलोनियां अफसरों की मिलीभगत से काटी गई है नगर निगम के अफसरों का इसमें बहुत बड़ा योगदान है और मौजूदा एमएलए अभी इस कॉलोनियों पर अपनी छत्रछाया बनाए हुए हैं तभी तो इन कॉलोनियों पर मकान बन कर तैयार हो चुके हैं जालंधर की एक सोसाइटी ने इस मुद्दे को बड़ी जोर से उठाया है और जल्द ही कारपोरेशन जाकर अधिकारियों से इसका जवाब यह सोसाइटी मांगेगी क्या कारण है कि इन कॉलोनाइजर ऊपर अधिकारियों की इतनी मेहर बनी हुई है।[

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