गुरुधामों में लगा सोना सिखों की सामूहिक अतुलनीय सरमाया हैः सुखबीर सिंह बादल* *कहा कि सिरसा का अचेत सुझाव अस्वीकार्य, माफी मांगना प्रशंसनीय है*

 

*गुरुधामों में लगा सोना सिखों की सामूहिक अतुलनीय सरमाया हैः सुखबीर सिंह बादल*

*कहा कि सिरसा का अचेत सुझाव अस्वीकार्य, माफी मांगना प्रशंसनीय है*

*आवश्यकता की इस घड़ी में सिखों ने मानवता पर सोने के दिल बरसाए*

समाचार आज तक*चंडीगढ़/21मईः*

शिरोमणी अकाली दल के अध्यक्ष सरदार सुखबीर सिंह बादल ने आज कहा कि सिख गुरुधामों पर लगा सोना तथा बाकी पवित्र वस्तुएं श्रद्धावान सिख कौम का सामूहिक अतुलनीय सरमाया है। उन्होने कहा कि किसी भी व्यक्ति यां संस्था द्वारा किसी भी काम के लिए, बेशक वह कितना भी मानवतावादी तथा नेक क्यों न हो, इस संपत्ति का जरा सा भी हिस्सा दान करने के बारे सोचने का सवाल ही पैदा नही होता है।

सरदार बादल ने कहा कि बेहद ऐतिहासिक तथा विरासती मुल्य रखने वाली इस सरमाए के साथ सिखों की धार्मिक भावनाएं जुड़ी हैं। इस सरमाए के किसी छोटे से भाग के बारे भी आए किसी सुझाव यां इससे जुड़े किसी सवाल का जवाब देते समय व्यक्ति को पूरी जिम्मेदारी तथा गहरी समझ से काम लेना चाहिए। बेशक ऐसे सुझाव के पीछे की मंशा कितनी भी नेक तथा मानववादी क्यों न हो। सरदार बादल ने कहा कि हमे पंथ को दुश्मनों की साजिशों तथा चालों के प्रति सदा सर्तक रहना चाहिए, जो कि ऐसे विषयों पर किसी सिख नेता की फिसली जुबान का हमेशा फायदा उठाने की उठाने की ताक में रहते हैं।

कोरोना वायरस के खिलाफ मानवता की सहायता के लिए विभिन्न धार्मिक संस्थाओं द्वारा सोने के दान संबधी एक प्रस्ताव के बारे डीएसजीएमसी के प्रमुख सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा द्वारा दिए एक ‘ अचेत जवाब’ पर उठे विवाद का हवाला देते हुए सरदार बादल ने कहा कि यह टिप्पणी अस्वीकार्य है, जिससे बचा जा सकता था। पर यह अच्छी बात है कि जत्थेदार सिरसा ने इस पर पछतावा करते हुए इस अचेत गलती के लिए सिखों से माफी मांग ली है। उन्होने कहा कि सिखों के आगे बिना शर्त माफी की पेशकश रखकर जत्थेदार सिरसा ने इस मुद्दे के सभी संशयों को दूर कर दिया है। उन्होने कहा कि पर कुछ शरारती तथा सिख विरोधी तत्व इस मुद्दे पर सिखों में अविश्वास तथा गलतफहमी पैदा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होने कहा कि सिखों को आपस में बांटकर सिख कौम को कमजोर, नेताविहीन तथा दिशाहीन करने की नाकाम कोशिशें की जा रही हैं। सरदार बादल ने कहा कि इस घटना ने सिख नेताओं को इस बात के लिए सजग कर दिया है कि वह हमारी शानदार धार्मिक विरासत पर असर डालने वाले सुझावों तथा सवालों के जवाब देते समय हमेशा सावधान तथा सतर्क रहें।

यहां एक प्रेस बयान जारी करते हुए सरदार बादल ने कहा कि सिख गुरुधामों में पड़ा सोना तथा बाकी वस्तुएं उस पवित्र विश्वास का प्रतीक हैं, जोकि सिखों को अपने धार्मिक प्रतिनिधियों पर है। यह विश्वास सिख गुरुधामों की प्रबंधक कमेटियांे पर एक बहुत बड़ी नैतिक तथा आध्यात्मिक जिम्मेदारी डालता है। इसीलिए सभी के लिए यह आवश्यक है कि मानवता के लिए इस तरह के किसी भी दान संबधी आए सुझावों का जवाब देते समय भाईचारे की धार्मिक भावनाओं का अवश्य ध्यान रखा जाए।

सरदार बादल ने कहा कि सिख समुदाय ने अपनी सेवा तथा कुर्बानी से एक उदाहरण कायम करके पूरी दुनिया में सम्मान प्राप्त किया है। उन्होने कहा कि सिखों द्वारा पूरी दुनिया में गरीबों ,जरूरतमंदों तथा भूखों की सहायता करके जिस सेवा तथा कुर्बानी की भावना का उदाहरण पेश किया जा रहा है, उसकी पूरी दुनिया द्वारा खड़े होकर सराहना की जा रही है।

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