‘मामा’ शिवराज सिंह चौहान को सत्ता से बेदखल करने में कांग्रेस को आया पसीना

The Congress came to the congress to oust the ‘Mama’ Shivraj Singh Chauhan from power

नई दिल्‍ली <<समाचार आज तक>> मध्‍यप्रदेश के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. एक दशक से अधिक समय से काबिज शिवराज सिंह चौहान सरकार के खिलाफ ‘एंटी इनकंबेसी’ फैक्‍टर भी पूरी तरह से कांग्रेस के काम नहीं आया और वह बहुमत के लिए जरूरी अंक तक नहीं पहुंच सकी. परिणामों की अंतिम घोषणा के बाद कांग्रेस पार्टी के खाते में 114 सीट आईं और वह बहुमत के लिए जरूरी 116 के आंकड़े से दो सीट दूर रही. मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) की ओर से समर्थन में घोषणा के बाद कांग्रेस को सत्‍ता की ‘सीढ़ी’ तो मिल गई है लेकिन शिवराज को पूरी तरह मात नहीं दे पाने की टीस लंबे समय तक उसे सालती रहेगी. मध्‍यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार टी20 मैच के तरह बेहद रोचक रहे. सीटों के रुझान में दोनों पार्टियों के बीच पूरे समय कड़ा संघर्ष चलता रहा और आखिरकार देर रात कांग्रेस को राहत की सांस लेने का मौका मिला. कभी रुझान में कांग्रेस पार्टी बाजी मारती दिख रही थी तो कभी बीजेपी (BJP) के इस रेस में आगे निकलने से भगवा पार्टी के समर्थकों को खुशी मनाने का मौका मिलता रहा. शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली बीजेपी को ‘मात’ देने में कांग्रेस को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा.
मध्‍यप्रदेश में इस बार हुए रिकॉर्ड मतदान के बाद ही कांग्रेस एक तरह से ‘विनिंग मोड’ में थी. ‘एंटी इनकंबेसी’ फैक्‍टर और एग्जिट पोल में अपने पक्ष में आए ज्‍यादातर रुझान को वह जीत का आधार मान रही थी लेकिन इस चुनावी समर में शिवराज सिंह ‘धरती पकड़’ साबित हुए. अंत में बाजी भले ही कांग्रेस के पक्ष में आई लेकिन शिवराज भी ‘विजेता’ से कम साबित नहीं हुए. दूसरे शब्‍दों में कहें तो मध्‍यप्रदेश के चुनाव परिणामों को शिवराज की ‘हार’ के बजाय कांग्रेस की ‘जीत’ कहा जाना उपयुक्‍त होगा.

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