कागजों में पल रहे गरीबों के अरमान, सरकारी एजेंसी गरीबों को जगह दिलाने में हुई  फेल

पार्ट वन : जेडीए के अफसर और बिल्डर पिस गए गरीब

कागजों में पल रहे गरीबों के अरमान सरकारी एजेंसी गरीबों को जगह दिलाने में हुई  फेल।

समाचार आज तक जालंधर अमिता शर्मा, 12 June

अकाली हो या कोई भी राज ! गरीबों के वोट बैंक समझकर सरकारी अफसर की मेहरबानी से राजनेता की पॉलिसी कागजों में रह जाती है।

गौरतलब है कि गरीबों के लिए कुछ साल पहले अकाली-भाजपा सरकार ने एक पॉलिसी का ऐलान किया था जिसके तहत सरकारी एजेंसियों ने गरीबों को रियायत दरों पर आशियाना देने की बात कही थी, लेकिन पिछले कई सालों में यह ऐलान सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहा।

 गरीबों का आशियाना पुड्डा के अधिकारियों एवं राजनीतिक आशीर्वाद से कागजों तक ही सीमित

जेडीए ने जिसमें पिछले सालों में 6 ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट में गरीबों के लिए आशियाना तो रखा लेकिन पुड्डा के अधिकारियों एवं राजनीतिक आशीर्वाद से यह कागजों तक ही सीमित रहा पिछले कुछ सालों से जेडीए अधिकारियों की मेहरबानी रही है। जो प्रोजेक्ट

The aspirations of the poor living on paper, the government agency failed to provide space to the poor.

कॉलोनाइजर द्वारा 2 साल में मकान मालिक को देने थे वह अभी तक नहीं दिए गए। जेडीए चाहे तो अपना बकाया ले सकता था जिससे  जालंधर शहर का नक्शा ही बदल सकता था।  करोड़ों खरबों रुपया जेडीए आज भी इकट्ठा करने पर आए तो शहर मैं कई तरह के सरकारी पार्क एवं कई सरकारी प्रोजेक्ट पर इन रुपयों को लगाकर शहर की तस्वीर बदली जा सकती थी।

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