*निजी स्कूल प्रबंधकों नें जरूरतमंद एवं जागरूक अभिभावकों को फीस मुद्दे को लेकर तंग नहीं करने का दिया है वचन, यह हम सब की जीत है :-“सारस”*

*निजी स्कूल प्रबंधकों नें जरूरतमंद एवं जागरूक अभिभावकों को फीस मुद्दे को लेकर तंग नहीं करने का दिया है वचन, यह हम सब की जीत है :-“सारस”*

_बिना मांगे माँ भी अपने बच्चे को दूध तक नहीं देती है, अभिभावक वर्ग अपने अधिकार को लेकर सजग तो हों, क्या मजाल की कोई हमें ठगने की जुर्रत करे:-“श्री चौधरी”_

 

पंजाब में दोआबा जोन के निजी स्कूलों एवं अभिभावकों के फीस मुद्दे को लेकर शुरू हुई लड़ाई बेहद हीं हास्यास्पद मोड़ पर पहुंच गई है.दोआबा जोन के निजी स्कूलों के तथाकथित मुखिया और चंद टुच्ची किस्म की पेड न्यूज कल्चर की मानसिकता वाले शोसल मीडियाकर्मी के बदौलत ऐसे हालात बन चुके हैँ की शर्म भी सर छुपाकर शर्मसार हो जाने पर विवश हो जाए.उक्त रहस्य पर से पर्दा उठाने का नैतिक कार्य किया है नैतिकता को बढ़ावा देने वाली संस्था “सारस”ने.
आज “सारस”कार्यकारिणी की विशेष बैठक के दौरान “सारस”के बोर्ड डायरेक्टर श्री एस. के. चौधरी ने स्पष्ट किया है की वह आरम्भ से हीं पंजाब भर के पेरेंट्स एसोशिएसन को अपना नैतिक समर्थन दे रहे हैँ और आगे भी देते रहेंगे. श्री चौधरी ने स्पष्ट किया है की वह सर्वप्रथम स्वयं एक अभिभावक है फिर कुछ और… I..उन्होंने शहर भर के निजी स्कूलों के मुखिया और वर्तमान में शहर में सबसे ज्यादा स्कूलों के मालिक (सेंट सोल्जर ग्रूप )श्री अनिल चोपड़ा को अनर्गल और बेसिर पैर की बयानबाजी के लिये आड़े हाथों लिया है. उन्होंने श्री अनिल चोपड़ा से पूछा है की ज़ब जागरूक अभिभावक अपने अधिकारों की बात करता है तो वह ब्लैकमेलर या शरारती तत्व कैसे हो जाता है.यह बिल्कुल ठीक है की आम अभिभावकों में अपने अधिकारों को लेकर जागरूकता की बेहद कमी है पर ब्लैकमेलर कौन है यह हम संस्थागत लोग और 15%हीं सही जागरूक पेरेंट्स इस बात को भलीभांति जानते हैँ. विशेषकर जो निजी स्कूल इमोशनल ब्लैकमेलिंग के जरिये हीं अपना दूकान चलाती है कम से कम वह अपने नैतिकता का ढिंढोरा न पीटे.. उन्होंने आगे कहा की संस्था “सारस” डी. सी महोदय और सांसद तक को 2020से हीं स्कूलों की धक्केशाही के बारे में प्रमाण सहित लिखित रूप से संज्ञान में लाती रही है, जबकि निजी स्कुलवाले पहले दिन से हीं माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों को तोड़ मरोड़कर पेश करते आ रहे हैँ.श्री चौधरी नें दो टुक शब्दों में कहा है की अगर निजी स्कूल संचालकों में जरा सी भी गैरत बची हो तो माननीय अदालत के अब तक के दिशा निर्देशों की कॉपी को लेकर,
अभिभावकों, मीडिया समुदाय एवं पदाधिकारीयों की उपस्तिथि में किसी स्कूल कैंपस में ही हमसे डिबेट कर लें, हम और हमारी संस्था सहर्ष इन मुद्दों से पीछे हटने को तैयार हैँ…उन्होंने एक बार फिर से शहर के उन निजी स्कूलों का धन्यवाद किया है जिन्होंने “सारस” की बातों को पहले दिन से हीं गौर से सुना और नैतिकता की मिशालें पेश की हैँ.

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