केपी बोले मेरा पॉलीटिकल मर्डर किया गया,, नहीं बक्शूंगा कातिलों को..

समाचार आज तक जालंधर अमिता शर्मा

लोकसभा चुनाव का सबसे रोचक राजनीतिक मंच जालंधर में तैयार हो चुका है। कांग्रेस के एमपी संतोख सिंह चौधरी को जालंधर से फिर से टिकट मिल चुकी है। 2014 में होशियारपुर से लोकसभा चुनाव हार चुके कांग्रेसी उम्मीदवार मोहिंदर सिंह केपी ने अब जालंधर आजाद सीट से अपना दावा ठोंक नजर आ रहे है. । उनके फैंस न्यू फेसबुक पर आजाद  इलेक्शन लड़ने की पोस्ट  की है । एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया  पॉलीटिकल मर्डर  कर दिया गया है  और  मैं  कातिलों को नहीं बक्शूंगा। वैसे जालंधर लोकसभा सीट पर कांग्रेस का इतिहास कहता है कि पार्टी ने कभी अपने उम्मीदवार को रिपीट नहीं किया है. इस समय चौधरी संतोख सिंह जालंधर से कांग्रेस के सांसद हैं। फिर भी पार्टी ने उन्हें जालंधर से टिकट दे दी है।.

लोकसभा की जालंधर से किसकी जीत होगी इन सब आंकड़ों पर अगर गौर करें तो दोआबा क्षेत्र में लोकसभा की दो सीटें जालंधर और होशियारपुर हैं। 2009 में कांग्रेस के उम्मीदवार मोहिंदर सिंह केपी ने अकाली दल के हंस राज हंस को हराया था. इस सीट पर लगातार 20 साल से कांग्रेस का कब्जा है. 2009 चुनाव से पहले यह सीट सुरक्षित नहीं थी. जालंधर लोकसभा सीट से पू्र्व प्रधानमंत्री इंदर कुमार गुजराल ने दो बार जीत हासिल की थी. पहली बार उन्होंने 1989 और फिर 1998 में यहां से जीत हासिल की थी

यहां पर एनआरआई वोट का एक बड़ा बैंक है। इन दोनों सीटों पर उम्मीदवारों के बीच कांटे की टक्कर रहती है। 2009 के चुनाव में एक मजेदार बात यह रही थी कि होशियारपुर सीट पर जीत हार का अंतर हजारों मेंनहीं बल्कि सिर्फ 366 वोटों का था।

बीजेपी के सोम प्रकाश कांग्रेस की संतोष चौधरी से महज 366 वोटों के अंतर से हार गए थे। कांग्रेस को 3 लाख 58 हजार 812 वोट मिले थे। जालंधर की सीट पर कांग्रेस के उम्मीदवार मोहिंदर सिंह केपी ने शिअद प्रत्याशी हंस राज हंस को 36 हजार 445 वोटों के अंतर से हरा दिया था। इस सीट पर मतदान प्रतिशतता 67 फीसदी रही और होशियारपुर सीट पर 65 फीसदी मतदान हुआ था।

पूर्व सांसद मोहिंदर सिंह केपी का कहना है कि उन्होंने अपनी इच्छा आलाकमान के सामने जाहिर थी। लेकिन उनके  राजनीतिक कैरियर का मर्डर किया गया है उनको लोकसभा की सीट ना देकर उनका मर्डर किया गया है। कई मौजूदा और पूर्व विधायक भी जालंधर से टिकट मांग रहे थे ।ड्रग्स मामले में अकाली-बीजेपी सरकार के दौरान मंत्री पद से हाथ धोने वाले सरवन सिंह फिल्लौर ने भी जालंधर से दावा पेश किया था। वह अकाली दल छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए हैं. 6 बार विधायक रहे फिल्लौर को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिल चुकी है.

वहीं पवन कुमार टीनू ने पिछला लोकसभा चुनाव भी अकाली दल की टिकट पर लड़ा था. लेकिन कांग्रेस के चौधरी संतोख सिंह से पिछड़ गए थे।

16वीं लोकसभा में जालंधर सुरक्षित सीट से कांग्रेस के संतोख सिंह चौधरी ने अकाली दल के पवन कुमार टीनू को 70,981 वोटों से हराया था. संतोख सिंह को 36.6 फीसदी वोट शेयर के साथ 3,80,479 मत और अकाली दल के टीनू को 29.7 वोट फीसद के साथ कुल 3,09,498 मत प्राप्त हुआ था. जबकि तीसरे नंबर पर 2,54,121 वोट लेकर आम आदमी पार्टी की उम्मीदवार ज्योति मान रही थीं।

 

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