किसान आंदोलन: सुप्रीम कोर्ट आज सुना सकता है फैसला, केंद्र ने की किसानों की ट्रैक्टर रैली रोकने की अपील

[“]केंद्र ने की किसानों की ट्रैक्टर रैली रोकने की अपील, सुप्रीम कोर्ट आज कर सकता है सुनवाई

केंद्र ने कोर्ट को बताया कि कृषि कानूनों के मामले में जल्दबाजी नहीं की गई बल्कि यह “दो दशकों के विचार-विमर्श का नतीजा” है.
समाचर आज तक, January 12, 2021

नई दिल्ली:

कृषि कानूनों और किसान आंदोलन से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर आज (मंगलवार 11 जनवरी) सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुना सकती है। किसानों के विरोध प्रदर्शन का मंगलवार को 48वां दिन है। प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन ने सोमवार को सुनवाई के दौरान इस बात का संकेत दिए थे कि मामले पर सुप्रीम कोर्ट मंगलवार को फैसला सुना सकता है। सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर भी इस संबंध में सूचना दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट किसान आंदोलन को लेकर अलग-अलग हिस्सों में आदेश पारित कर सकती है। वहीं क्रेंद सरकार ने इस पूरे मामले पर प्रारंभिक हलफनामा दाखिल किया है। सरकार ने एक अर्जी भी डाली है, जिसमें उन्होंने 26 जनवरी को किसानों के द्वारा ट्रैक्टर रैली न निकालने का आदेश देने को कोर्ट से अपील की है।

. इस बीच, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल करके गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) पर किसानों की ट्रैक्टर रैली पर रोक लगाने की अपील की है. कृषि कानून वापस नहीं लिए जाने की सूरत में किसानों की 26 जनवरी को दिल्ली में बड़ी रैली करने की योजना है. हरियाणा के किसानों की भी रैली आयोजित करने की तैयारी है. इसके तहत हर गांव से एक ट्रैक्टर रैली में शामिल होगा.
केंद्र ने सोमवार को शीर्ष अदालत से 26 जनवरी को प्रस्तावित ट्रैक्टर रैली अथवा किसी भी तरह के मार्च पर रोक लगाने के आदेश देने का अनुरोध किया. दिल्ली पुलिस के माध्यम से दायर एक आवेदन में केंद्र ने कहा कि सुरक्षा एजेंसियों को प्रदर्शनकारियों के एक छोटे समूह अथवा संगठन द्वारा गणतंत्र दिवस के मौके पर ट्रैक्टर रैली निकालने की योजना बनाई है.

आवेदन में कहा गया, ”इस तरह के मार्च अथवा रैली के कारण गणतंत्र दिवस उत्सव में व्यवधान पैदा हो सकता है और कानून-व्यवस्था की स्थिति प्रभावित हो सकती है. ऐसे में शीर्ष अदालत से किसी भी तरह के मार्च, रैली अथवा वाहन रैली को रोकने के संबंध में अनुरोध किया जाता है.”

केंद्र ने कोर्ट को बताया कि कृषि कानूनों के मामले में जल्दबाजी नहीं की गई बल्कि यह “दो दशकों के विचार-विमर्श का नतीजा” है. देश के किसान खुश हैं क्योंकि उन्हें मौजूदा विकल्पों के साथ एक अतिरिक्त विकल्प दिया गया है… कोई निहित अधिकार नहीं छीना गया है.”

सरकार ने कहा कि उसने किसानों के दिमाग में चल रही किसी भी तरह की गलतफहमी को दूर करने के लिए किसानों के साथ जुड़ने की पूरी कोशिश की है. हलफनामे में कहा गया, “केंद्र की ओर से प्रयासों में कोई कमी नहीं की गई है.”

सोमवार को मामले की सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की ओर से ट्रैक्टर रैली का मुद्दा उठाए जाने के बाद केंद्र से हलफनामा दायर करने के लिए कहा गया था. मेहता चाहते हैं कि रैली पर रोक लगाई जाए. सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश ने केंद्र को इस मामले में हलफनामा दाखिल करने के लिए कहा था. बता दें कि शीर्ष न्यायालय किसान के प्रदर्शन और कृषि कानूनों से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है.

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