एल्डिको ग्रीन कंपनी के विला की कंस्ट्रक्शन में कई तरह की खामियां, दूसरा केस भी जीते एल्डिको ग्रीन रेजिडेंट, कंपनी को देना पड़ेगा 3 Lakh का जुर्माना

डिफेक्टिव विला देने पर  रेजिडेंट को तीन लाख रुपये मुआवजा देगी कंपनी

एल्डिको ग्रीन कंपनी के विला की कंस्ट्रक्शन में कई तरह की खामियां,  दूसरा केस भी जीते एल्डिको ग्रीन वेलफेयर के प्रधान 

 क्लब आनंदम के खिलाफ  2017 में जंग लड़ी थी, जीती सोसाइटी

समाचार आज तक, जालंधर(अमिता शर्मा) : एल्डिको ग्रीन कंपनी के विला की कंस्ट्रक्शन में कई तरह की खामियां, पाई गई। जालंधर में  एल्डिको ग्रीन  वेलफेयर सोसाइटी प्रधान वाले डॉ वीके खुल्लर ने लंबे समय बाद एल्डिको ग्रीन कंपनी की  कमियों  के खिलाफ  दूसरीी जंग भी जीत ली है।

एल्डिको ग्रीन कंपनी के डिफेक्टिव विला का कंपनी ने दिया 3 लाख का जुर्माना

आमतौर पर व्यक्ति जब भी किसी फ्लैट में शिफ्ट होता है तो वह यह सपने लेकर जाता है कि पूरी जिंदगी इस फ्लैट में आराम से कटेगी। लेकिन सोसायटी के प्रधान डॉ वीके खुल्लर ने बताया कि जालंधर एल्डिको ग्रीन कंपनी अपनी शर्तों पर पूरा नहीं उतर रही। कंपनी की ओर से जब फ्लैट देने की शर्तें बताई जाती हैं।एल्डिको कंपनी इन शब्दों पर पूरी तरह से फेल रही।  इस बार तो फ्लैट में कंस्ट्रक्शन बहुत ज्यादा खराब थी।   फ्लैट में शिफ्ट किया तो कुछ समय बाद ही फ्लैट मे सलाबा आना शुरू हो गया था। हमने अपने जीवन भर की कमाई इस मकान यानी इस फ्लैट को दे दी और मिला भी क्या खराब कंस्ट्रक्शन और कई जगह से सलाबा। जिसको लेकर उन्होंने कई बार कंपनी के मैनेजर को कहा लेकिन उन्होंने रेजिडेंट्स की एक न सुनी। हताश होकर ने कोर्ट में केस किया । सवा 2 साल बाद अदालत ने अपना डिसीजन  फ्लैट निवासी केे हक में दिया।

रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथारिटी ( रेरा ) इस मामले में अदालती लड़ाई लड़ने वाले एल्डिको ग्रीनस रेजिडेंट्स वेलफेयर सोसायटी के प्रधान विनोद खुल्लर को अब तीन लाख रुपये मुआवजा देगी । उन्होंने बताया कि एल्डिको में दिए गए विला में नियमों के अनुसार कंपनी ने पांच साल तक किसी प्रकार का डिफेक्ट होने पर रिपेयर करवानी थी । उनके विला में वुडन फ्लोर , दीवार मैं पूरा सलाबा आ गया था जिसकी वजह से सारी टाइलें भी खराब हो गई थी, उसके अलावा और भी कई तरह के डिफेक्ट थे । जिसे लेकर कई बार जुबानी और लिखित शिकायत दी , लेकिन कंपनी ने कोई कार्रवाई नहीं की । इसके बाद सवा दो साल पहले उन्होंने बतौर सोसायटी प्रेसिडेंट के तौर पर अदालत में केस दायर कर दिया था । अब जाकर फैसला उनके हक में आया ।

काफी समय से संघर्ष कर रही है एल्डिको ग्रीन सोसाइटी , पुलिस से सेटिंग के जरिए नहीं होती कार्रवाई

सोसायटी के रेजिडेंट एवं प्रधान ने बताया कि जबसे उन्होंने एल्डिको मैं फ्लैट लियाा है, तब से लेकर अब तक उनको एवं कई रेजिडेंट को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है ।  क्लब आनंदम, लॉन टेनिस, रेजिडेंट को आ रही समस्याएं, पोलूशन इत्यादि को लेकर रोजानाा झगड़े।  नाम ना देने की एवज में एक रेजिडेंट ने बताया कि कंपनी की सिक्योरिटी भी गाड़ियों की ठीक से चैकिंग नहीं करती, पिछले दिनों  बत्रा जी के ऊपर वाले फ्लैट में चिट्टा गैंग उल्टे सीधे काम करता था जिसको सीआईए स्टाफ द्वारा दबा दिया गया। कई बार विला के आसपास चोर भी पकड़े गए लेकिन पुलिस की सेटिंग इतनी जबरदस्त है कि कोई कार्रवाई नहीं की जाती।  आसपास का माहौल इतना ज्यादा खराब है ज्यादा आवाज उठाने पर कई बार तो उन्हें बाउंसरों की धमकी भी दी जाती थी।  सूत्रों की माने तो कई रेजिडेंट को कंपनी द्वारा उनके बिजनेस में नुकसान करवाने की धमकी तक दी जाती है। उन्होंने बताया कि क्लब आनंदम कंपनी ने लीज पर दे दिया था जबकि फ्लैट लेते वक्त लाइफटाइम फीस क्लब की उनसे वसूली गई थी बावजूद उसके मासिक चार्ज मांगा जा रहा था। उन्होंने बताया कि  एल्डिको ग्रीन कंपनी के नियमों के अनुसार वह फ्लैट लेतेे वक्त एडवांस मेंें  आजीवन मेंबरशिप के पैसे भी जमा कर चुके हैं बावजूद इसके बार-बार कंपनी पैसा मांगती थी। और कंपनी के खिलाफ उनको केस लड़ना पड़ा बाद मैंैै जीत सच्चाई की हुई । जीत हमेशा सच्चाई की ही होती है चाहे आप की लड़ाई किसी बड़ी हस्ती से क्यों ना हो।

प्रॉपर्टी के विज्ञापनों की सच्चाई की तह तक जाएं तभी फ्लैट ले

आम तौर पर जब आप किसी प्रॉपर्टी का विज्ञापन देखते हैं तो उसमें सुपर बिल्ट अप एरिया लिखा जाता है. ऐसे विज्ञापनों पर बहुत ही ध्यान देना चाहिए क्योंकि जब विज्ञापन दिया जाता है तो बहुत कुछ मैच नहीं करता । वैसे तो हर रेजिडेंट इस परेशानी से झुलस रहा है लेकिन आवाज हर कोई नहीं उठाता क्योंकि हर कोई इन झगड़ों में पडना नहीं चाहता। हर व्यक्ति फ्लैट में शिफ्ट होने के बाद अपने ही पैसे लगाकर उसमें मेंटेनेंस दोबारा करा लेता है। अगर ₹३  लाख का मुआवजा एक रेसिडेंट को मिला है तो  600 प्लॉट्स एवं फ्लैट है । खुद ही अनुमान लगा ले कि कंपनी की कंस्ट्रक्शन तो एक जैसी होती है। हर व्यक्ति को जो नुकसान हो रहा है क्या उसका कंपनी क्या मुआवजा देगी या उन सब को भी इसी तरीके से केस लड़ना पड़ेगा?

इस बारे में हमने एल्डिको ग्रीन कंपनी के मैनेजर का पक्ष लेना चाहा लेकिन उन्होंने हमारा फोन नहीं उठाया। वह अपना पक्ष समाचार आज तक को दे सकते हैं हम उनका पक्ष प्रमुखता से छापेंगे।

अगली स्टोरी में हम दिखाएंगे जालंधर के ही एक बिल्डर की कहानी जिसने फ्लैट के नाम पर लोगों से पैसा तो ले लिया है और समय पर पजेशन नहीं दी है, जिसमें लोगों को हरासमेंट झेलनी पड़ रही है। हमारी विनती है कि ऐसे लोगों से बचें ।

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