अर्जुन कल तुम्हारी मौत होने वाली है और तुम चैन की नीद सो रहे हो ? अर्जुन बोले – जब मुझे बचाने वाला बेचेन है , तो फिर मै चैन से क्यों न सोऊ .

Dharmik;

Satpal Mharaj

जब महाभारत में भीष्म पितामह ने प्रतिज्ञा की कि कल पांडवो को मार डालूँगा , तो भगवान धर्म संकट में आ गए एक ओर भक्त भीष्म की प्रतिज्ञा और दूसरी ओर अर्जुन . भगवान को नीद नहीं आ रही थी यहाँ से वहाँ , टहल रहे थे , आधी से ज्यादा रात हो गई . भगवान ने सोचा प्रतिज्ञा तो अर्जुन ने भी सुनी होगी अर्जुन को भी नीद नही आ रही होगी . जाकर देखता हूँ , भगवान जैसे ही अर्जुन के शिविर में गए , तो देखा अर्जुन तो खराटे मार – मार कर सो रहे है .भगवान ने कहा – अर्जुन कल तुम्हारी मौत होने वाली है और तुम चैन की नीद सो रहे हो ? अर्जुन बोले – जब मुझे बचाने वाला बेचेन है , तो फिर मै चैन से क्यों न सोऊ . भगवान समझ गए अब मुझे ही कुछ करना होगा , अब _ _ भगवान द्रोपदी के पास गए , बोले द्रोपदी तु विधवा हो गई , द्रोपदी हसने लगी , बोली – मै विधवा हो जाउंगी ये चिंता मै क्यों करूँ ? । भगवान बोले – द्रोपदी मेरे साथ चल , अब द्रोपदी को ब्रह्म मुहूर्त में पितामह के शिविर में लेकर चलते है , द्रोपदी की चप्पल आवाज कर रही थी , भगवान बोले द्रोपदी चप्पल उतार लो , आवाज कर रही है , हम विपक्ष के शिविर में जा रहे है , द्रोपदी ने चप्पल उतार ली , और भगवान ने द्रोपदी के चप्पल अपने पीतंबर बांध ली
_ _ और खूब सिखा कर भेजते है कि क्या करना है . द्रोपदी चूँघट डालकर सुबह ब्रह्म मुहूर्त में जाती है और पितामह के चरण स्पर्श करती है , तो पितामह के मुख से आशीर्वाद निकलता है पुत्री अखंड सौभाग्यवती भव : अब पितामह जैसा अखंड ब्रह्मचारी आशीर्वाद दे , वह कैसे फलीभूत न होता . जब पितामह को पता चलता है कि ये द्रोपदी है , तो वे समझ जाते है सब करनी केशव की है . द्रोपदी से पूंछा , केशव कहाँ है ? द्रोपदी बोली – बाहर है आपके सैनिक ने अंदर नहीं आने दिया , झट बाहर गए और देखा सामने एक पेड़ के नीचे द्रोपदी की चप्पल सिरहाने रखकर सो रहे थे , भीष्म पितामह जी भगवान के चरणों में गिर पड़े और बोले – प्रभु जिस भक्त की चप्पल आपने अपने सिरहाने रख ली , उस भक्त का कोई बाल भी बंका नहीं
भगवान अर्जुन से कहते है मेरे से कोई सम्बन्ध जोड़ लो . अर्जुन कहते है , केशव आपसे सम्बन्ध तो जोड़ लूँ , पर सम्बन्ध का अर्थ तो आप जानते ही है , सम्बन्ध अर्थात दोनों ओर से समानता का बंधन , एक सा बंधन , पर केशव मै न निभा पाया तो ? बस यही डर है . भगवान बोले – अर्जुन ! तु जोड़ तो सही तुम नहीं निभा पाओगे तो कोई बात नहीं मै तो निभाऊंगा ही , और भगवान ऐसा करते भी है .
सुदामा से मित्रता करी और निभाई भी , अर्जुन से सम्बन्ध बनाया अर्जुन से ज्यादा निभाया . द्रोपदी जी ने भगवान के हाथ से जब रक्त निकलता देखा , तो तुरंत अपने _ _ आचल को फाड़कर भगवान की अंगुली से बांध दिया , उस समय भगवान द्रोपदी से बोले – बहन ! एक दिन तुम्हारे इस चीर के हर धागे का मोल में चुकाऊंगा , और भगवान ने भरी सभा में ऐसा किया भी था .

” काह करे बैरी प्रबल ,
जो सहाय यदुवीर ,
दस हजार गज बल थक्यो , थक्यो ना दस गज चीर . ”

दुशासन में दस हजार हाथियों का बल था , इतने बल से चीर खीचा , पर द्रोपदी के चीर का छोर न पा सका . कहने का अभिप्राय हम कैसे भी है , भगवान हमेशा हमें निभा लेगे , हम निभा पाये या न निभा पाये . जैसे एक किसान है वह गौ को एक खूटे से बांध देता है तो वह बंध जाती है . इसलिए हम कैसे भी करके उनके निकट आ जाए , जैसे हवा है हमें दिखायी नहीं देती पर यदि हम पंखे के नीचे आ जाए , या पास आ जाए तो हमें हवा का अनुभव होने लगता है , इसी तरह भगवान हमें दिखायी नहीं देते परन्तु जब हम उनसे कोई सम्बन्ध जोड़ लेते है उनके निकट आ जाते है तो फिर हमें अनुभव होने लगता है .

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